राष्ट्रीय नागरिकता प्रमाणपत्र का मुद्दा उठते ही काफी परिवारों में हड़कंप मचा है। नागरिकता का साक्ष्य जुटाने के लिए एक वर्ग विशेष के परिवारों ने जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नगर निगम का रुख कर लिया है।
सन 1971 के बाद जन्म लेने वाले लोगों की निगम से जन्म प्रमाणपत्र पाने की होड़ लगी है। प्रतिदिन ऐसे आवेदकों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच रही है। प्रशासन इन आवेदनों की जांच पड़ताल में जुटा है।
बांग्लादेश बनने से पहले 25 मार्च 1971 से पहले जो लोग असम में आए, उनको भारत का नागरिक माना जाएगा। इसके बाद आने वाले किसी भी व्यक्ति को भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।
इसके लिए केंद्र सरकार ने संदिग्ध लोगों की जांच शुरू करा दी है। ऐसे सभी लोगों की जांच का कार्य देशभर में चल रहा है। गृह मंत्री अमित शाह के देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) बनाने के बयान के बाद से संदिग्ध लोगों में हड़कंप मचा है।
सन 1971 के बाद जन्म लेने वाले लोगों की निगम से जन्म प्रमाणपत्र पाने की होड़ लगी है। प्रतिदिन ऐसे आवेदकों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच रही है। प्रशासन इन आवेदनों की जांच पड़ताल में जुटा है।
बांग्लादेश बनने से पहले 25 मार्च 1971 से पहले जो लोग असम में आए, उनको भारत का नागरिक माना जाएगा। इसके बाद आने वाले किसी भी व्यक्ति को भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।
इसके लिए केंद्र सरकार ने संदिग्ध लोगों की जांच शुरू करा दी है। ऐसे सभी लोगों की जांच का कार्य देशभर में चल रहा है। गृह मंत्री अमित शाह के देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) बनाने के बयान के बाद से संदिग्ध लोगों में हड़कंप मचा है।
भारतीय नागरिकता की पुष्टि के लिए सन 1971 के बाद भारत में जन्मे खासकर एक वर्ग विशेष के परिवारों ने जिनके पास जन्म का कोई प्रमाणपत्र नहीं है। इन लोगों ने नगर निगम से जन्म प्रमाणपत्र लेने के लिए आवेदन शुरू कर दिए हैं।
पिछले एक माह में निगम में तीन हजार से ज्यादा लोग आवेदन कर चुके हैं। हालांकि ऐसे आवेदनों पर बनाए गए जन्म प्रमाणपत्रों की संख्या 50-60 ही बतायी जा रही है। अधिकांश अभी जांच के दायरे में हैं।
मीट फैक्टरियों में काम करते हैं बांग्लादेशी
शहर में मीट फैक्टरियों में काफी लोग काम करते हैं, जिनको बांग्लादेशी बताया जाता रहा है। इनमें कुछ कश्मीरी हैं। आरोप है कि इन बांग्लादेशियों ने अपने राशन कार्ड भी बनवा लिए हैं, जिसके आधार पर इन्होंने भारतीय नागरिक होने का दावा भी किया।
अब ये लोग नगर निगम से जन्म प्रमाणपत्र पाने की जुगत में लगे हैं। पूर्व में ऐसे संदिग्ध लोगों ने साठगांठ करके काफी दस्तावेज बनवा लिए, जिनकी जांच भी चल रही है।
पिछले एक माह में निगम में तीन हजार से ज्यादा लोग आवेदन कर चुके हैं। हालांकि ऐसे आवेदनों पर बनाए गए जन्म प्रमाणपत्रों की संख्या 50-60 ही बतायी जा रही है। अधिकांश अभी जांच के दायरे में हैं।
मीट फैक्टरियों में काम करते हैं बांग्लादेशी
शहर में मीट फैक्टरियों में काफी लोग काम करते हैं, जिनको बांग्लादेशी बताया जाता रहा है। इनमें कुछ कश्मीरी हैं। आरोप है कि इन बांग्लादेशियों ने अपने राशन कार्ड भी बनवा लिए हैं, जिसके आधार पर इन्होंने भारतीय नागरिक होने का दावा भी किया।
अब ये लोग नगर निगम से जन्म प्रमाणपत्र पाने की जुगत में लगे हैं। पूर्व में ऐसे संदिग्ध लोगों ने साठगांठ करके काफी दस्तावेज बनवा लिए, जिनकी जांच भी चल रही है।
साबित करनी होगी नागरिकता
किसी भी व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जन्म का प्रमाण तो देना ही होगा। इसके लिए नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर से प्रमाण पत्र लेना होगा। जांच के दौरान सुबूत न मिलने पर व्यक्ति को संदिग्ध माना जाएगा।
आवेदनों की संख्या में हुई वृद्धि
ऐसे आवेदनों की संख्या बढ़ी है। लेकिन आवेदन के साथ सभी प्रमाण लिए जा रहे हैं। क्षेत्रीय पार्षद की संस्तुति और सफाई निरीक्षक से जांच करायी जाती है। जन्म के अधिक समय बाद अगर कोई व्यक्ति जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करता है तो उस आवेदन को सिटी मजिस्ट्रेट के पास अंतिम संस्तुति के लिए भेजा जाता है। उसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। -डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
किसी भी व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जन्म का प्रमाण तो देना ही होगा। इसके लिए नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर से प्रमाण पत्र लेना होगा। जांच के दौरान सुबूत न मिलने पर व्यक्ति को संदिग्ध माना जाएगा।
आवेदनों की संख्या में हुई वृद्धि
ऐसे आवेदनों की संख्या बढ़ी है। लेकिन आवेदन के साथ सभी प्रमाण लिए जा रहे हैं। क्षेत्रीय पार्षद की संस्तुति और सफाई निरीक्षक से जांच करायी जाती है। जन्म के अधिक समय बाद अगर कोई व्यक्ति जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करता है तो उस आवेदन को सिटी मजिस्ट्रेट के पास अंतिम संस्तुति के लिए भेजा जाता है। उसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। -डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
जन्म प्रमाणपत्र के लिए देने होंगे ये प्रपत्र
- जिस स्थान पर जन्म हुआ वहां के तत्कालीन जनप्रतिनिधि की संस्तुति
- यदि अस्पताल में पैदा हुए तो वहां का रिकॉर्ड
- सन 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आने का परिचय
- मतदाता पहचान पत्र और शैक्षिक प्रमाण पत्र
- पेन कार्ड, आधार कार्ड
- एक शपथ पत्र
- क्षेत्रीय सफाई निरीक्षक की जांच रिपोर्ट